1. किन्हीं चार महाजनपदों के नाम लिखें?
उत्तर: चार प्रमुख महाजनपद इस प्रकार हैं—
(i) मगध
(ii) अंग
(iii) वज्जि
(iv) काशी
2. आहत सिक्के क्या थे?
उत्तर: आहत सिक्के भारत के प्राचीनतम सिक्कों में गिने जाते हैं। ये छठी शताब्दी ईसा पूर्व में प्रचलन में थे। इन्हें धातु की चादर को ठोककर बनाया जाता था। ये प्रायः चांदी और तांबे के होते थे तथा इन पर ठप्पा लगाकर सूर्य, चंद्र, पशु-पक्षी आदि के चिन्ह अंकित किए जाते थे।
3. महाजनपद से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: छठी शताब्दी ईसा पूर्व में भारत के राजनीतिक क्षेत्र में जो बड़े-बड़े राज्य अस्तित्व में आए, उन्हें महाजनपद कहा जाता है। बौद्ध और जैन ग्रंथों में 16 महाजनपदों का उल्लेख मिलता है। इनमें मगध, वज्जि, कोशल, कुरु, पांचाल, गांधार और अवंति प्रमुख थे।
4. फाह्यान कौन था? वह भारत कब आया?
उत्तर: फाह्यान एक प्रसिद्ध चीनी यात्री था। वह चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में, लगभग पाँचवीं शताब्दी में भारत आया था।
5. ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपि में क्या अंतर है?
उत्तर:
ब्राह्मी लिपि:
(i) ब्राह्मी लिपि बाएं से दाएं लिखी जाती थी।
(ii) इसका प्रयोग पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में व्यापक रूप से होता था।
खरोष्ठी लिपि:
(i) खरोष्ठी लिपि दाएं से बाएं लिखी जाती थी।
(ii) इसका प्रयोग मुख्यतः उत्तर-पश्चिमी भारत में होता था।
6. गुप्त काल के दो अभिलेखों के नाम लिखें।
उत्तर: गुप्त काल के दो प्रमुख अभिलेख हैं—
(i) हरिषेण द्वारा रचित प्रयाग प्रशस्ति अभिलेख।
(ii) रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख।
7. मौर्यकालीन इतिहास के प्रमुख स्रोत का नाम बताइए।
उत्तर: मौर्यकालीन इतिहास के प्रमुख स्रोतों में मेगस्थनीज की ‘इंडिका’, कौटिल्य का ‘अर्थशास्त्र’, अशोक के शिलालेख तथा बौद्ध और जैन ग्रंथ शामिल हैं।
8. मौर्य कालीन कला और स्थापत्य का वर्णन करें।
उत्तर: मौर्य काल में कला और स्थापत्य का उल्लेखनीय विकास हुआ। इस काल के शासकों ने अनेक स्तूप, गुफाएँ और स्तंभ बनवाए। सम्राट अशोक का इसमें विशेष योगदान रहा। उन्होंने लगभग 84,000 स्तूपों का निर्माण कराया तथा सारनाथ में प्रसिद्ध अशोक स्तंभ स्थापित करवाया। मौर्य कला अपनी भव्यता और उत्कृष्ट शिल्पकला के लिए जानी जाती है।
9. मौर्य प्रशासन की जानकारी दें।
उत्तर: मौर्य साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र थी। प्रशासन को सुचारु रूप से चलाने के लिए साम्राज्य को चार प्रमुख प्रांतों—तोषाली, सुवर्णगिरि, तक्षशिला और उज्जैन—में विभाजित किया गया था। प्रत्येक प्रांत में मंत्री परिषद होती थी। प्रांतों को जिलों में तथा जिलों को गाँवों में बांटा गया था, जिससे शासन व्यवस्था मजबूत बनी रहती थी।
10. कलिंग युद्ध का अशोक पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: 261 ईसा पूर्व अशोक ने कलिंग पर आक्रमण किया और विजय प्राप्त की। इस युद्ध में भारी जनहानि हुई—लगभग डेढ़ लाख लोग बंदी बनाए गए और एक लाख से अधिक लोग मारे गए। इस भीषण रक्तपात को देखकर अशोक का हृदय परिवर्तन हो गया। इसके बाद उन्होंने हिंसा त्यागकर बौद्ध धर्म और शांति का मार्ग अपनाने का संकल्प लिया।
11. अशोक के धम्म से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: अशोक का धम्म नैतिक आचरण और मानवता पर आधारित सिद्धांतों का समूह था। यह सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की भावना पर आधारित था। इसमें बड़ों का आदर, सेवकों और दासों के प्रति अच्छा व्यवहार तथा सभी समुदायों के प्रति सहिष्णुता का संदेश दिया गया। धम्म का मुख्य उद्देश्य मानव कल्याण और नैतिक जीवन को बढ़ावा देना था।
12. अशोक द्वारा दिए गए संदेशों की वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता सिद्ध कीजिए।
उत्तर: अशोक के धम्म के संदेश आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने नैतिकता, अहिंसा, सहिष्णुता और मानवता पर जोर दिया। वर्तमान समय में सामाजिक सद्भाव, धार्मिक सहिष्णुता और नैतिक मूल्यों की आवश्यकता पहले से अधिक है। अशोक के विचार हमें शांति, प्रेम और आपसी सम्मान के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।
13. सातवाहन कौन थे ?
उत्तर: सातवाहन प्राचीन भारत का एक प्रमुख हिंदू राजवंश था। उन्होंने आंध्र प्रदेश क्षेत्र में अपना राज्य स्थापित किया। इस वंश की स्थापना सिमुक ने लगभग 60 ईसा पूर्व की थी। सातवाहन वंश के प्रमुख शासकों में शातकर्णि प्रथम, गौतमीपुत्र शातकर्णि और वशिष्ठिपुत्र पुलुमावी आदि शामिल थे।
14. कनिष्क प्रथम की जीवनी एवं उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: कनिष्क कुषाण वंश का महान और शक्तिशाली शासक था। उसने 78 ईस्वी से 101 ईस्वी तक शासन किया। कनिष्क ने अपने साम्राज्य का विस्तार करते हुए कई क्षेत्रों पर विजय प्राप्त की। उसने 78 ईस्वी में शक संवत की शुरुआत की। वह बौद्ध धर्म का संरक्षक था और महायान शाखा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसके शासनकाल में कला, संस्कृति और व्यापार को विशेष प्रोत्साहन मिला।
15. गुप्तकालीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: गुप्तकाल में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उल्लेखनीय विकास हुआ। इस काल के महान गणितज्ञ आर्यभट दशमलव पद्धति से परिचित थे। उन्होंने बताया कि पृथ्वी गोल है और अपनी धुरी पर घूमती है। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘आर्यभटीय’ है। वराहमिहिर भी इस युग के प्रसिद्ध खगोलशास्त्री थे। उन्होंने ‘बृहत संहिता’ की रचना की और बताया कि चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है।
16. किन्हीं दो गुप्तकालीन मंदिरों के नाम लिखिए।
उत्तर: एरण का विष्णु मंदिर (सागर, मध्य प्रदेश) तथा देवगढ़ का दशावतार मंदिर (ललितपुर, उत्तर प्रदेश) गुप्तकालीन मंदिरों के प्रमुख उदाहरण हैं।
17. चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य की उपलब्धियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: चंद्रगुप्त द्वितीय गुप्त वंश का एक पराक्रमी और प्रभावशाली सम्राट था। उसने ‘विक्रमादित्य’ की उपाधि धारण की। उसने शक शासकों को पराजित कर अपने साम्राज्य का विस्तार किया। उसके शासनकाल को गुप्त वंश का स्वर्ण युग कहा जाता है। उसके दरबार में नौ रत्न थे। चीनी यात्री फाह्यान उसके शासनकाल में भारत आया था।
18. समुद्रगुप्त की नेपोलियन से तुलना क्यों की जाती है?
उत्तर: समुद्रगुप्त गुप्त वंश का एक महान शासक था। वह अत्यंत वीर, साहसी और कुशल सेनानायक था। उसने अनेक युद्धों में विजय प्राप्त कर अपने साम्राज्य का विस्तार किया। उसकी विजयों और सैन्य कौशल के कारण इतिहासकार उसकी तुलना नेपोलियन से करते हैं।
19. मौर्य साम्राज्य के पाँच प्रमुख राजनीतिक केंद्रों के नाम बताइए।
उत्तर: मौर्य साम्राज्य के पाँच मुख्य राजनीतिक केंद्र निम्नलिखित थे—
(i) पाटलिपुत्र
(ii) तक्षशिला
(iii) उज्जयिनी
(iv) तोसली
(v) सुवर्णगिरि
20. अभिलेख से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: अभिलेख वे लेख होते हैं, जो स्तंभों, चट्टानों, गुफाओं, ताम्रपत्रों या पत्थरों जैसी कठोर सतहों पर खुदे होते हैं। इनके माध्यम से उस समय की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और धार्मिक परिस्थितियों की जानकारी मिलती है। प्राचीन अभिलेख प्रायः प्राकृत भाषा में लिखे गए हैं तथा इनकी लिपि ब्राह्मी, खरोष्ठी या अरामाइक होती थी।
21. सरदारी प्रथा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: सरदारी प्रथा चोल, चेर और पांड्य राज्यों में प्रचलित एक व्यवस्था थी। इसके अंतर्गत सरदार एक प्रभावशाली और शक्तिशाली व्यक्ति होता था। यह पद कभी-कभी वंशानुगत होता था, परंतु यह आवश्यक नहीं था। सरदार का मुख्य कार्य धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन करना, युद्ध में नेतृत्व देना और विवादों के समाधान में मध्यस्थता करना था।
22. अग्रहार क्या था?
उत्तर: अग्रहार उस भूमि को कहा जाता था, जिसे ब्राह्मणों को दान स्वरूप प्रदान किया जाता था। इस भूमि पर उनसे किसी प्रकार का कर नहीं लिया जाता था। ब्राह्मणों को उस क्षेत्र में कर वसूलने तथा अधिकारपूर्वक रहने की सुविधा प्राप्त होती थी।
23. गृहपति कौन था?
उत्तर: गृहपति परिवार का मुखिया होता था। वह घर की महिलाओं, बच्चों, नौकरों और दासों पर अधिकार रखता था। घर की संपत्ति का स्वामी भी वही होता था। कई बार यह शब्द नगरों में रहने वाले समृद्ध और प्रतिष्ठित व्यक्तियों के लिए भी प्रयुक्त होता था।
24. मेगास्थनीज कौन था? किस शासक ने उसे अपना राजदूत बनाकर भारत भेजा था?
उत्तर: मेगास्थनीज एक यूनानी राजदूत और यात्री था। उसे यूनानी शासक सेल्युकस निकेटर ने चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में अपना दूत बनाकर भेजा था। उसने भारत के बारे में ‘इंडिका’ नामक पुस्तक लिखी, जो उस समय की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है।
1. हर्यक वंश का संस्थापक कौन था? उनका कार्यकाल बताएं।
उत्तर:
हर्यक वंश का संस्थापक बिम्बिसार था।
- कार्यकाल: लगभग 544 ईसा पूर्व से 492 ईसा पूर्व
- राजधानी: राजगृह (वर्तमान राजगीर)
- प्रमुख कार्य:
- विवाह संबंधों द्वारा राज्य का विस्तार
- अंग राज्य को जीतकर मगध में मिलाया
- प्रशासन को मजबूत बनाया
2. मौर्य काल के राजनीतिक इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत क्या-क्या हैं?
उत्तर:
मौर्य काल के इतिहास की जानकारी निम्न स्रोतों से मिलती है—
- अभिलेख – अशोक के शिलालेख और स्तंभ लेख
- अर्थशास्त्र – लेखक: कौटिल्य
- इंडिका – लेखक: मेगस्थनीज
- पुराण एवं बौद्ध-जैन ग्रंथ
- विदेशी यात्रियों के वर्णन
3. मगध साम्राज्य पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
उत्तर:
मगध प्राचीन भारत का सबसे शक्तिशाली राज्य था। इसकी राजधानी पहले राजगृह और बाद में पाटलिपुत्र थी।
- प्रमुख वंश: हर्यक, नंद, मौर्य, शुंग
- गंगा नदी के उपजाऊ मैदान के कारण कृषि समृद्ध थी
- लोहे की प्रचुरता से सेना मजबूत हुई
- चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक जैसे महान शासक यहीं से हुए
मगध ने पूरे उत्तर भारत में अपना प्रभुत्व स्थापित किया।
4. अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए क्या कार्य किए?
उत्तर:
अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए—
- बौद्ध धर्म को राजधर्म के रूप में अपनाया
- स्तूपों और विहारों का निर्माण कराया (जैसे सांची स्तूप)
- अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा
- शिलालेखों के माध्यम से धर्म का प्रचार किया
- तीसरी बौद्ध संगीति का आयोजन कराया
5. सुदर्शन झील के निर्माण और महत्व का उल्लेख करें।
उत्तर:
सुदर्शन झील का निर्माण चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में उसके गवर्नर पुष्यगुप्त द्वारा कराया गया।
- स्थान: गिरनार पर्वत के पास (गुजरात)
- बाद में रुद्रदामन प्रथम ने इसकी मरम्मत करवाई
- महत्व:
- सिंचाई की सुविधा
- कृषि उत्पादन में वृद्धि
- जनता को जल आपूर्ति
6. गुप्त काल को भारत का स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है?
उत्तर:
गुप्त वंश (चंद्रगुप्त प्रथम से स्कंदगुप्त तक) के काल को भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है क्योंकि—
- कला और साहित्य का उत्कर्ष (कालिदास जैसे महान कवि)
- विज्ञान और गणित में प्रगति (आर्यभट्ट)
- स्वर्ण मुद्राओं का प्रचलन
- शिक्षा केंद्रों का विकास (नालंदा)
- राजनीतिक स्थिरता और समृद्धि
इस काल में भारत सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से अत्यंत उन्नत था, इसलिए इसे स्वर्ण युग कहा जाता है।
1. हर्यक वंश का संस्थापक और कार्यकाल
उत्तर: हर्यक वंश के संस्थापक बिंबिसार थे।
कार्यकाल: बिंबिसार ने लगभग 544 ई.पू. से 492 ई.पू. तक शासन किया।
उन्होंने वैवाहिक संबंधों और विजयों के माध्यम से मगध साम्राज्य का विस्तार शुरू किया था। उनके बाद उनके पुत्र अजातशत्रु ने सत्ता संभाली।
2. मौर्य राजनीतिक इतिहास के महत्वपूर्ण स्रोत
मौर्य काल के बारे में जानने के लिए हमारे पास साहित्यिक और पुरातात्विक दोनों तरह के पुख्ता प्रमाण हैं:
साहित्यिक स्रोत: * अर्थशास्त्र (कौटिल्य): राज्य प्रशासन और राजनीति पर सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथ।
इंडिका (मेगस्थनीज): मौर्य प्रशासन और समाज का आंखों देखा वर्णन।
मुद्राराक्षस (विशाखदत्त): चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा नंद वंश के विनाश की कथा।
बौद्ध और जैन ग्रंथ: जैसे दीपवंश, महावंश और कल्पसूत्र।
पुरातात्विक स्रोत:
अशोक के अभिलेख: पत्थरों और स्तंभों पर खुदे लेख जो अशोक के साम्राज्य और धम्म की जानकारी देते हैं।
सिक्के: उस समय के आहत सिक्के (Punch-marked coins)।
3. मगध साम्राज्य पर संक्षिप्त टिप्पणी
मगध प्राचीन भारत के 16 महाजनपदों में सबसे शक्तिशाली बनकर उभरा। इसकी सफलता के मुख्य कारण इसकी भौगोलिक स्थिति, गंगा की उपजाऊ भूमि, और लोहे की खानों (झारखंड क्षेत्र) की उपलब्धता थी, जिससे उन्नत हथियार बनाए जा सके।
प्रमुख राजवंश: हर्यक, शिशुनाग, नंद और अंततः महान मौर्य वंश।
राजधानी: पहले राजगृह (पहाड़ियों से घिरी) और बाद में पाटलिपुत्र (जल दुर्ग)।
मगध ने ही पहली बार भारत को एक सूत्र में बांधने का प्रयास किया।
4. अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए क्या किया?
कलिंग युद्ध के बाद अशोक का हृदय परिवर्तन हुआ और उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया। इसके प्रचार के लिए उन्होंने निम्नलिखित कार्य किए:
धम्म महापात्रों की नियुक्ति: समाज में नैतिकता और धर्म फैलाने के लिए विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की।
तीसरी बौद्ध संगीति: पाटलिपुत्र में बौद्ध भिक्षुओं का एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया।
विदेशों में प्रचार: अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा। साथ ही सीरिया, मिस्र और यूनान में भी दूत भेजे।
शिलालेख और स्तंभ: बौद्ध सिद्धांतों को सरल भाषा (प्राकृत) में पत्थरों पर खुदवाया ताकि आम जनता उन्हें पढ़ सके।
5. सुदर्शन झील का निर्माण और महत्व
सुदर्शन झील प्राचीन भारत के जल प्रबंधन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका इतिहास गुजरात के गिरनार (सौराष्ट्र) क्षेत्र से जुड़ा है।
निर्माण: इसका निर्माण चंद्रगुप्त मौर्य के प्रांतीय राज्यपाल पुष्यगुप्त ने करवाया था।
मरम्मत: बाद में अशोक के काल में तुषास्प ने, शक शासक रुद्रदामन ने और गुप्त शासक स्कंदगुप्त ने इसकी मरम्मत करवाई।
महत्व: यह झील सिंचाई का प्रमुख स्रोत थी। शुष्क क्षेत्र होने के कारण यहाँ से नहरें निकाली गई थीं ताकि खेती को बढ़ावा मिल सके। रुद्रदामन के जूनागढ़ अभिलेख में इसका विस्तृत वर्णन मिलता है।
6. गुप्त काल को 'स्वर्ण युग' क्यों कहा जाता है?
गुप्त काल (लगभग 319 ई. - 550 ई.) को भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग इसलिए माना जाता है क्योंकि इस दौरान कला, विज्ञान और साहित्य में अभूतपूर्व प्रगति हुई:
साहित्यिक प्रगति: कालिदास जैसे महान कवि इसी काल में हुए (अभिज्ञानशाकुंतलम)।
विज्ञान और गणित: आर्यभट्ट (शून्य और दशमलव का सिद्धांत) और वराहमिहिर इसी युग की देन हैं।
कला और वास्तुकला: अजंता की गुफाओं की चित्रकारी और दशावतार मंदिर जैसे शानदार मंदिरों का निर्माण हुआ।
धार्मिक सहिष्णुता: हिंदू धर्म का पुनरुत्थान हुआ, लेकिन बौद्ध और जैन धर्म को भी पूरा सम्मान मिला।
आर्थिक समृद्धि: विदेशी व्यापार और सोने के सिक्कों (दीनार) की प्रचुरता ने साम्राज्य को बेहद समृद्ध बनाया।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :
1. इतिहास लेखन में अभिलेखों के महत्व पर निबंध लिखिए।
उत्तर: इतिहास लेखन में अभिलेखों का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। पत्थर, धातु, मिट्टी के पात्र या अन्य कठोर सतहों पर खुदे हुए लेखों को अभिलेख कहा जाता है। इन अभिलेखों से तत्कालीन राजाओं की उपलब्धियों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं, धार्मिक विचारों तथा दान संबंधी विवरणों की जानकारी मिलती है। कई अभिलेखों में निर्माण की तिथि भी अंकित होती है, जिससे घटनाओं का सही काल निर्धारित करने में सहायता मिलती है।
यदि किसी अभिलेख पर तिथि न हो, तो उसकी लिपि और लेखन शैली के आधार पर उसके समय का अनुमान लगाया जाता है। अभिलेख इतिहास के प्रामाणिक स्रोत माने जाते हैं, क्योंकि वे प्रत्यक्ष प्रमाण प्रदान करते हैं। सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में अनेक शिलालेख और स्तंभलेख खुदवाए, जिनसे उनके धम्म, नीतियों और जनकल्याण संबंधी विचारों की जानकारी मिलती है। इस प्रकार अभिलेख इतिहास को समझने का विश्वसनीय माध्यम हैं।
2. मौर्य प्रशासन का वर्णन करें। [2015A, 2024A]
उत्तर: मौर्य प्रशासन सुव्यवस्थित और संगठित था। इसे मुख्यतः चार भागों में विभाजित किया जा सकता है—
(1) केंद्रीय शासन
(2) प्रांतीय शासन
(3) नगर शासन
(4) ग्राम शासन
(क) केंद्रीय शासन: राजा शासन का प्रमुख होता था, परंतु वह पूर्णतः निरंकुश नहीं था। उसे मंत्रिपरिषद की सलाह प्राप्त होती थी। परिषद में लगभग 12 से 20 मंत्री होते थे। शासन व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए विभिन्न विभाग बनाए गए थे, जिन्हें ‘तीर्थ’ कहा जाता था। प्रत्येक विभाग का अध्यक्ष महामात्य या अमात्य कहलाता था।
(ख) प्रांतीय शासन: विशाल साम्राज्य को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए उसे कई प्रांतों में बांटा गया था। प्रमुख प्रांतों में तक्षशिला (उत्तरापथ), उज्जयिनी (पश्चिम), तोसली (पूर्व) और सुवर्णगिरि (दक्षिण) शामिल थे। इन प्रांतों का शासन प्रायः राजकुमारों या विश्वसनीय अधिकारियों के हाथों में होता था।
(ग) नगर शासन: नगर प्रशासन के लिए विशेष अधिकारी नियुक्त किए जाते थे। वे व्यापार, सुरक्षा, सफाई और कर वसूली आदि का प्रबंध करते थे।
(घ) ग्राम शासन: ग्राम प्रशासन की जिम्मेदारी ग्रामणी के पास होती थी। वह गांव की व्यवस्था, कर संग्रह और शांति बनाए रखने का कार्य करता था।
इस प्रकार मौर्य प्रशासन संगठित, केंद्रीकृत और प्रभावी था।
5. गुप्तकाल को प्राचीन भारत का स्वर्ण युग क्यों कहा जाता है?
उत्तर: गुप्तकाल में ज्ञान-विज्ञान, कला, स्थापत्य और साहित्य के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई। गुप्त शासक समुद्रगुप्त ने अपने पराक्रम से साम्राज्य का विस्तार किया और सांस्कृतिक उन्नति को बढ़ावा दिया। चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के दरबार में नवरत्नों का वास था। आर्थिक दृष्टि से भी यह समृद्धि का काल था।
इस समय कालिदास जैसे महान कवि हुए, जिन्होंने ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’, ‘रघुवंश’, ‘मेघदूत’ और ‘कुमारसंभव’ जैसी रचनाएँ कीं। दिल्ली का लौह स्तंभ तथा अजंता की गुफाओं की उत्कृष्ट चित्रकला भी इसी काल की देन है। इन उपलब्धियों के कारण गुप्तकाल को प्राचीन भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है।
6. मौर्य साम्राज्य के नगर प्रशासन पर प्रकाश डालें।
उत्तर: मौर्य प्रशासन चार भागों—केंद्रीय, प्रांतीय, नगर और ग्राम—में विभाजित था।
नगर शासन: मेगास्थनीज के अनुसार नगर प्रशासन 30 सदस्यों की एक परिषद द्वारा संचालित होता था, जिसे 6 समितियों में बाँटा गया था। प्रत्येक समिति में 5 सदस्य होते थे। ये समितियाँ थीं—
(i) शिल्पकला समिति
(ii) वैदेशिक समिति
(iii) जनसंख्या समिति
(iv) वाणिज्य-व्यवसाय समिति
(v) वस्तु निरीक्षक समिति
(vi) कर समिति
इन समितियों का कार्य नगर की व्यवस्था, व्यापार, जनगणना, विदेशी आगंतुकों की देखभाल और कर वसूली आदि देखना था।
3. मगध साम्राज्य के उदयान के कारण थे? [2013A, 2016A, 2022A, 2023A]
उत्तर: मगध महाजनपद के शक्तिशाली बनने के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे—
- यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से सुरक्षित था, चारों ओर पहाड़ियाँ इसकी रक्षा करती थीं।
- यहाँ उपजाऊ भूमि उपलब्ध थी तथा गंगा और सोन नदियों से सिंचाई की सुविधा थी, जिससे कृषि उन्नत थी।
- जंगलों में हाथी मिलते थे, जो युद्ध में सहायक सिद्ध होते थे।
- जनसंख्या अन्य जनपदों की तुलना में अधिक थी।
- यहाँ के शासक योग्य, पराक्रमी और महत्वाकांक्षी थे।
- लोहे की खदानें उपलब्ध थीं, जिससे उत्तम हथियार बनाए जाते थे।
4. चंद्रगुप्त मौर्य की जीवनी एवं उपलब्धियों की विवेचना करें। [2014A, 2017A]
उत्तर: चंद्रगुप्त मौर्य मौर्य वंश के संस्थापक थे। उन्होंने नंद वंश को पराजित कर मौर्य साम्राज्य की स्थापना की। उनका शासनकाल लगभग 322 ईसा पूर्व से 298 ईसा पूर्व तक रहा।
उन्होंने यूनानी शासक सेल्युकस निकेटर को हराकर उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों पर अधिकार स्थापित किया। उनके शासन में एक सुदृढ़ और केंद्रीकृत प्रशासनिक व्यवस्था विकसित हुई। चाणक्य (कौटिल्य) उनके प्रमुख सलाहकार थे, जिन्होंने ‘अर्थशास्त्र’ की रचना की। चंद्रगुप्त मौर्य के प्रयासों से एक विशाल और संगठित साम्राज्य की नींव पड़ी।

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