12th Geography Book 1 Chapter 6 द्वितीयक क्रियाएं subjective
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. कुटीर उद्योग एवं लघु उद्योग में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: कुटीर और लघु उद्योगों में मुख्य अंतर निम्नलिखित है:
कुटीर उद्योग: ये उद्योग बहुत ही छोटे स्तर पर घरों में संचालित किए जाते हैं। इनमें मुख्य रूप से परिवार के सदस्यों (पारिवारिक श्रम) का उपयोग होता है, जैसे- बुनाई, कढ़ाई और दस्तकारी।
लघु उद्योग: ये कुटीर उद्योगों से थोड़े बड़े होते हैं। इनमें मशीनों और किराए के श्रमिकों का उपयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए- फर्नीचर निर्माण और खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing)। इनमें उत्पादन की मात्रा भी अधिक होती है।
प्रश्न 2. स्वच्छंद उद्योग (Footloose Industry) की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: स्वच्छंद उद्योगों की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
ये उद्योग व्यापक विविधता वाले किसी भी स्थान पर स्थापित किए जा सकते हैं।
ये किसी विशिष्ट प्रकार के कच्चे माल पर निर्भर नहीं होते।
इनका संचालन मुख्य रूप से 'संघटक पुर्जों' (Components) पर निर्भर होता है।
इनमें उत्पादन और श्रमिकों की आवश्यकता कम मात्रा में होती है।
सामान्यतः ये उद्योग प्रदूषण नहीं फैलाते हैं।
प्रश्न 3. द्वितीयक क्रियाकलाप (Secondary Activities) किसे कहते हैं?
उत्तर: वे क्रियाएँ जिनमें प्राकृतिक संसाधनों (कच्चे माल) को प्रसंस्करण के माध्यम से नए और मूल्यवान उत्पादों में बदला जाता है, द्वितीयक क्रियाएँ कहलाती हैं। ये क्रियाएँ प्राथमिक क्षेत्रों (जैसे- कृषि, खनन) से प्राप्त सामग्री पर निर्भर करती हैं। सभी प्रकार के उद्योग-धंधे इसी श्रेणी में आते हैं।
प्रश्न 4. स्वामित्व के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर: स्वामित्व (Ownership) के आधार पर उद्योगों को तीन वर्गों में बाँटा गया है:
सार्वजनिक क्षेत्र (Public Sector): ये उद्योग पूर्णतः सरकार के नियंत्रण और स्वामित्व में होते हैं।
निजी क्षेत्र (Private Sector): इन उद्योगों का स्वामित्व किसी एक व्यक्ति या निजी कंपनी के पास होता है।
संयुक्त क्षेत्र (Joint Sector): इनका संचालन सरकार और निजी कंपनी दोनों मिलकर करते हैं।
प्रश्न 5. औद्योगिक प्रदेश किसे कहते हैं और इन्हें "धुएँ की चिमनी वाला उद्योग" क्यों कहा जाता है?
उत्तर: वह क्षेत्र जहाँ भारी उद्योगों (जैसे- लोहा-इस्पात, रसायन, भारी इंजीनियरिंग) का अधिक विकास होता है, औद्योगिक प्रदेश कहलाता है। इन उद्योगों की चिमनियों से लगातार धुआँ निकलता रहता है, जो वायु प्रदूषण का कारण बनता है, इसीलिए इन्हें "धुएँ की चिमनी वाला उद्योग" भी कहा जाता है।
प्रश्न 6. बड़े पैमाने के उद्योग की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर: बड़े पैमाने के उद्योगों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
इनमें कार्य का विभाजन और विशेष कौशल (Specialization) होता है।
उत्पादन के लिए आधुनिक मशीनों और उच्च तकनीक (Technology) का प्रयोग किया जाता है।
इनमें भारी मात्रा में पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है।
कुशल श्रमिकों द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का बड़े स्तर पर उत्पादन किया जाता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 7. उद्योगों की अवस्थिति (स्थान) को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक कौन-कौन से हैं?
उत्तर: किसी भी स्थान पर उद्योग की स्थापना मुख्य रूप से इन कारकों पर निर्भर करती है:
कच्चे माल की उपलब्धता: उद्योग अक्सर वहीं लगाए जाते हैं जहाँ कच्चा माल आसानी से मिल जाए।
शक्ति के साधन: मशीनों को चलाने के लिए सस्ती और निरंतर बिजली की आपूर्ति।
अनुकूल जलवायु: कुछ उद्योगों (जैसे सूती वस्त्र) के लिए विशेष जलवायु की आवश्यकता होती है।
श्रमिकों की उपलब्धता: सस्ते और कुशल मजदूरों की पहुँच।
पूँजी: निवेश के लिए पर्याप्त धन की सुविधा।
प्रश्न 8. स्वच्छंद उद्योग (Footloose Industry) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: ये वे आधुनिक उद्योग हैं जो किसी विशेष कच्चे माल पर निर्भर नहीं होते। इनकी मुख्य विशेषताएं हैं:
ये उद्योग कहीं भी स्थापित किए जा सकते हैं क्योंकि ये 'संघटक पुर्जों' (Components) पर आधारित होते हैं जो कहीं से भी मंगाए जा सकते हैं।
इनमें प्रदूषण न के बराबर होता है।
ये कम श्रमिकों के साथ भी कुशलता से काम करते हैं।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 1. निर्माण उद्योग के स्थानीयकरण (Localization) को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: किसी उद्योग का किसी विशेष स्थान पर स्थापित होना कई भौगोलिक और आर्थिक कारणों पर निर्भर करता है:
बाजार तक पहुँच: तैयार माल को बेचने के लिए बाजार का निकट होना आवश्यक है। इससे परिवहन खर्च कम होता है। (जैसे- भारी मशीनरी या जल्दी खराब होने वाले सामान के उद्योग)।
कच्चे माल की सुलभता: भारी या वजन घटने वाले कच्चे माल (जैसे- गन्ना, लोहा) पर आधारित उद्योग कच्चे माल के स्रोत के पास ही लगाए जाते हैं।
श्रम की आपूर्ति: उद्योगों को चलाने के लिए सस्ते और तकनीकी रूप से कुशल श्रमिकों की आवश्यकता होती है।
पूँजी और आधारभूत ढांचा: बैंकिंग सुविधा, संचार और परिवहन के अच्छे साधन उद्योगों के विकास की गति बढ़ा देते हैं।
कच्चे माल के आधार पर उद्योगों का वर्गीकरण
प्रश्न 2. कच्चे माल के आधार पर उद्योगों को वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर: कच्चे माल के स्रोत के आधार पर उद्योगों को पाँच मुख्य भागों में बाँटा जा सकता है:
i. कृषि आधारित उद्योग: जो खेती से प्राप्त उत्पादों का उपयोग करते हैं। (उदाहरण: चीनी, सूती वस्त्र, तेल)।
ii. खनिज आधारित उद्योग: जो खनिजों का उपयोग करते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं:
धात्विक: लोहा-इस्पात, तांबा।
अधात्विक: सीमेंट, मिट्टी के बर्तन।
iii. रसायन आधारित उद्योग: जो रासायनिक पदार्थों का उपयोग करते हैं। (उदाहरण: प्लास्टिक, उर्वरक, कृत्रिम रेशे)।
iv. वन आधारित उद्योग: जो वनों से प्राप्त लकड़ी, लाख या कागज़ की लुगदी का उपयोग करते हैं। (उदाहरण: फर्नीचर, कागज़)।
v. पशु आधारित उद्योग: जो जानवरों से प्राप्त कच्चा माल उपयोग करते हैं। (उदाहरण: चमड़ा, ऊन, डेयरी उत्पाद)।
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