Sociology Class 12th सामाजिक संस्थाएं Subjective
अध्याय - 3: सामाजिक संस्थाएं (Sociology Class 12th)
1. एकाकी परिवार (Nuclear Family) क्या है?
उत्तर: वह परिवार जिसमें केवल माता-पिता और उनके अविवाहित बच्चे एक साथ रहते हैं, उसे 'एकाकी' या 'परमाणु' परिवार कहते हैं। यह परिवार का सबसे छोटा और सीमित रूप होता है।
2. नातेदारी की रीतियों की व्याख्या करें।
उत्तर: नातेदारी की रीति वह व्यवस्था है जिसमें एक व्यक्ति अपने जन्म के परिवार और विवाह के बाद बनने वाले परिवार, दोनों से जुड़ा होता है।
जनक परिवार: वह परिवार जिसमें व्यक्ति जन्म लेता है और अपना बचपन बिताता है (जैसे: माता, पिता, भाई-बहन)।
जनन परिवार: वह परिवार जो व्यक्ति विवाह के बाद स्वयं स्थापित करता है (जैसे: पति/पत्नी और बच्चे)।
3. प्रजापत्य विवाह को परिभाषित करें।
उत्तर: यह विवाह का वह सात्विक रूप है जहाँ कन्या का पिता बिना किसी ताम-झाम या दहेज के लेन-देन के, केवल अच्छे संस्कारों और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अपनी बेटी का विवाह संपन्न करता है। इसमें भौतिक प्रदर्शन की तुलना में मर्यादा को अधिक महत्व दिया जाता है।
4. परिहार नातेदारी संबंध (Avoidance Relationship) क्या है?
उत्तर: कुछ रिश्तों में मर्यादा और लोक-शर्म के कारण एक निश्चित दूरी बनाए रखनी पड़ती है। इसमें रिश्तेदार एक-दूसरे के सामने आने या सीधे बात करने से संकोच करते हैं।
उदाहरण: ससुर और बहू का रिश्ता।
5. अंतर्विवाह और बहिर्विवाह को परिभाषित करें।
उत्तर: * अंतर्विवाह (Endogamy): जब कोई व्यक्ति अपने ही समूह, जाति, उपजाति या समुदाय के भीतर विवाह करता है, तो उसे अंतर्विवाह कहते हैं। हिंदू समाज में अपनी ही जाति में विवाह करना इसका प्रमुख उदाहरण है।
बहिर्विवाह (Exogamy): जब कोई व्यक्ति अपने समूह, कुल या गोत्र से बाहर किसी दूसरे समूह में विवाह करता है, तो उसे बहिर्विवाह कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य रक्त संबंधों में विवाह को रोकना होता है।
6. अनुलोम विवाह क्या है?
उत्तर: अनुलोम विवाह उस विवाह को कहते हैं जिसमें उच्च जाति या ऊंचे सामाजिक स्तर का पुरुष (लड़का) अपने से नीची जाति या स्तर की स्त्री (लड़की) से विवाह करता है। प्राचीन भारतीय समाज में इस प्रकार के विवाह को मान्यता प्राप्त थी।
7. प्राथमिक नातेदारी क्या है?
उत्तर: प्राथमिक नातेदारी वे रिश्ते होते हैं जिनसे हमारा सीधा संबंध होता है। ये रिश्ते या तो रक्त (खून) पर आधारित होते हैं या विवाह पर। समाजशास्त्रियों के अनुसार प्राथमिक नातेदारी के कुल 8 प्रकार होते हैं।
उदाहरण: माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी, और पुत्र-पुत्री।
8. द्वितीयक नातेदारी क्या है?
उत्तर: प्राथमिक नातेदारों के प्राथमिक नातेदारों को 'द्वितीयक नातेदार' कहा जाता है। सरल शब्दों में, वे रिश्तेदार जो सीधे तौर पर हमसे नहीं जुड़े होते, बल्कि हमारे किसी प्राथमिक रिश्तेदार के जरिए जुड़े होते हैं। इनकी संख्या लगभग 33 प्रकार की मानी जाती है।
उदाहरण: दादा-दादी (पिता के माता-पिता), नाना-नानी, चाचा, मामा, साला-साली आदि।
9. तृतीयक नातेदारी क्या है?
उत्तर: हमारे द्वितीयक नातेदारों के जो प्राथमिक नातेदार होते हैं, उन्हें तृतीयक नातेदार कहते हैं। नातेदारी की यह श्रेणी काफी विस्तृत होती है और इसकी संख्या लगभग 151 प्रकार की बताई गई है।
उदाहरण: साले की पत्नी, मामा का लड़का, मौसा के भाई आदि।
10. बहिर्विवाह क्या है?
उत्तर: बहिर्विवाह वह सामाजिक नियम है जो एक व्यक्ति को अपने स्वयं के समूह (जैसे गोत्र, पिंड या परिवार) से बाहर विवाह करने के लिए अनिवार्य करता है। इसका वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व यह है कि यह सगोत्र विवाहों को रोककर परिवार में नए रक्त संबंधों और सामाजिक बंधनों को बढ़ावा देता है।
11. नातेदारी से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: नातेदारी संबंधों की वह व्यवस्था है जो समाज द्वारा स्वीकृत होती है। यह व्यवस्था या तो प्रजनन (रक्त संबंधों) पर आधारित होती है या फिर विवाह पर। नातेदारी समाज में व्यक्ति की स्थिति, अधिकारों और कर्तव्यों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
12. हिन्दू विवाह के मुख्य उद्देश्यों की विवेचना करें।
उत्तर: हिन्दू धर्म में विवाह को एक पवित्र संस्कार माना गया है, जिसके मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
धर्म का पालन: धार्मिक अनुष्ठानों को पूरा करने के लिए पत्नी का साथ होना आवश्यक माना गया है।
प्रजा (संतान प्राप्ति): वंश परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए संतान उत्पन्न करना।
रति (आनंद): पति-पत्नी के बीच प्रेम और शारीरिक संतुष्टि।
ऋणों से मुक्ति: पितृ ऋण से मुक्ति पाने के लिए संतान (विशेषकर पुत्र) प्राप्ति।
सामाजिक उत्तरदायित्व: परिवार बसाकर समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना।
13. हिन्दू विवाह में गोत्र के महत्व का वर्णन करें।
उत्तर: हिन्दू समाज में गोत्र का अत्यधिक महत्व है क्योंकि यह माना जाता है कि एक ही गोत्र के लोग एक ही पूर्वज की संतान हैं। इसलिए, एक ही गोत्र में विवाह करना 'भाई-बहन' के रिश्ते के समान माना जाता है और इसे वर्जित (निषेध) किया गया है। गोत्र का मुख्य कार्य विवाह के समय यह सुनिश्चित करना होता है कि विवाह रक्त संबंधों से बाहर हो।
14. समूह विवाह की विशेषताओं का उल्लेख करें।
उत्तर: समूह विवाह वह प्रथा है जिसमें एक ही समय और एक ही स्थान पर कई जोड़ों का विवाह संपन्न कराया जाता है। इसकी मुख्य विशेषताएँ हैं:
यह कम खर्चीला होता है, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।
यह सामाजिक एकता और भाईचारे को बढ़ावा देता है।
दहेज जैसी कुरीतियों को कम करने में सहायक होता है।
15. विवाहमूलक नातेदारी को उदाहरण सहित परिभाषित करें।
उत्तर: वे नातेदारी संबंध जो विवाह के माध्यम से बनते हैं, उन्हें विवाहमूलक नातेदारी कहते हैं। जब दो व्यक्तियों का विवाह होता है, तो केवल वे दोनों ही नहीं जुड़ते, बल्कि उनके परिवारों के बीच भी नए रिश्ते बन जाते हैं।
उदाहरण: सास-ससुर, ननद, जेठ, दामाद, बहू आदि।
16. गोत्र बहिर्विवाह क्या है?
उत्तर: गोत्र बहिर्विवाह का अर्थ है अपने गोत्र से बाहर किसी अन्य गोत्र में विवाह करना। हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति अपने ही गोत्र की कन्या से विवाह नहीं कर सकता। इसे ही 'गोत्र बहिर्विवाह' का नियम कहा जाता है।
17. जाति व्यवस्था के दोषों की विवेचना करें।
उत्तर: जाति व्यवस्था भारतीय समाज का एक प्राचीन हिस्सा है, लेकिन आधुनिक समय में इसके कई गंभीर दोष सामने आए हैं:
आर्थिक प्रगति में बाधा: यह व्यवस्था व्यक्ति की योग्यता के बजाय जन्म को महत्व देती है, जिससे प्रतिभा दब जाती है।
सामाजिक विभाजन: ऊँच-नीच की भावना के कारण समाज कई टुकड़ों में बँट जाता है, जिससे राष्ट्रीय एकता प्रभावित होती है।
छुआछूत की भावना: जातिवाद ने अस्पृश्यता जैसी कुरीति को जन्म दिया, जिससे मानवीय गरिमा को ठेस पहुँचती है।
कार्य कुशलता में कमी: पेशा पहले से तय होने के कारण लोग अपनी रुचि के अनुसार काम नहीं कर पाते, जिससे उत्पादकता घटती है।
18. हिन्दू विवाह की प्रकृति की व्याख्या करें।
उत्तर: हिन्दू विवाह केवल एक 'समझौता' नहीं बल्कि एक पवित्र संस्कार माना जाता है। इसकी प्रकृति धार्मिक है। यह दो परिवारों, संस्कृतियों और आत्माओं का मिलन है। इसे जन्म-जन्मांतर का बंधन माना जाता है जिसे आसानी से तोड़ा नहीं जा सकता। इसका मुख्य उद्देश्य केवल शारीरिक सुख नहीं, बल्कि धर्म का पालन और पितृ ऋण से मुक्ति पाना है।
19. मातुलेय नातेदारी रीति क्या है?
उत्तर: 'मातुलेय' (Avunculate) एक ऐसी नातेदारी रीति है जिसमें मामा का स्थान सर्वोपरि होता है। ऐसी व्यवस्था आमतौर पर उन समाजों में पाई जाती है जहाँ माँ की प्रधानता होती है (मातृसत्तात्मक परिवार)। यहाँ भांजे और भांजियों के जीवन में पिता से अधिक अधिकार और जिम्मेदारी मामा की होती है।
20. जाति एवं वर्ण में अन्तर स्पष्ट करें।
उत्तर: जाति और वर्ण के बीच मुख्य अंतर नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है:
आधार | जाति (Caste) | वर्ण (Varna) |
आधार | यह जन्म और वंशानुक्रम पर आधारित है। | यह गुण, कर्म और स्वभाव पर आधारित है। |
संख्या | जातियों और उपजातियों की संख्या हजारों में है। | वर्ण केवल चार हैं (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र)। |
परिवर्तन | जाति को बदला नहीं जा सकता। | प्राचीन समय में व्यक्ति कर्म बदलकर वर्ण बदल सकता था। |
लचीलापन | यह एक बंद और कठोर व्यवस्था है। | यह तुलनात्मक रूप से लचीली व्यवस्था थी। |
21. जनजातियों की किन्हीं दो समस्याओं का वर्णन करें।
उत्तर: जनजातीय समुदायों की दो प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं:
शिक्षा का अभाव: सुदूर इलाकों में निवास और सुविधाओं की कमी के कारण जनजातीय बच्चे आज भी आधुनिक शिक्षा से दूर हैं।
सांस्कृतिक पृथक्करण: बाहरी दुनिया से संपर्क कम होने के कारण वे आधुनिक विकास की मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाते, जिससे उनमें आर्थिक पिछड़ापन बना रहता है।
22. सोरोरेट (Sororate) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: सोरोरेट विवाह की वह प्रथा है जिसमें एक पुरुष अपनी पत्नी की बहन (साली) से विवाह करता है। सामान्यतः यह तब होता है जब पत्नी की मृत्यु हो जाए, ताकि बच्चों की देखभाल सही ढंग से हो सके और पारिवारिक संबंध बने रहें। इसे 'साली विवाह' भी कहा जाता है।
23. अनुसूचित जाति से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: अनुसूचित जाति उन समुदायों को कहा जाता है जिन्हें ऐतिहासिक रूप से सामाजिक भेदभाव, अन्याय और अस्पृश्यता का सामना करना पड़ा। भारतीय संविधान के तहत इन्हें विशेष दर्जा और आरक्षण दिया गया है ताकि ये समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर सम्मानजनक जीवन जी सकें।
24. बहुपति विवाह को सोदाहरण परिभाषित करें।
उत्तर: बहुपति विवाह (Polyandry) वह प्रथा है जिसमें एक महिला के एक ही समय में एक से अधिक पति होते हैं।
उदाहरण: भारत में दक्षिण की 'टोडा' जनजाति और हिमालय के कुछ क्षेत्रों में यह प्रथा देखी जाती है। महाभारत में द्रौपदी का पांडवों से विवाह इसका एक पौराणिक उदाहरण है।
1. मुस्लिम समुदाय में कितने प्रकार के विवाह होते हैं?
उत्तर: मुस्लिम समुदाय में विवाह (निकाह) को एक नागरिक अनुबंध (Civil Contract) माना जाता है। मुख्य रूप से इसके दो प्रकार हैं:
निकाह (Nikah): यह एक स्थायी विवाह है जिसे समाज में पूर्ण मान्यता प्राप्त है।
मुता (Muta): यह एक अस्थायी विवाह है जो एक निश्चित समय के लिए किया जाता है (यह मुख्य रूप से शिया समुदाय में प्रचलित है)।
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