12th Hindi Chapter 2 उसने कहा था Subjective
अध्याय 2. उसने कहा था
-: कवि का परिचय :-
लेखक – चन्द्रधर शर्मा गुलेरी
जन्म – 7 जुलाई, 1883
निधन – 12 सितंबर, 1922
जन्म – स्थान – जयपुर, राजस्थान
मूल निवास – गुलेर, नामक ग्राम, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश।
पिता – पंडित शिवराम।
शिक्षा –
(i) बचपन में संस्कृत की शिक्षा।
(ii) 1899 में इलाहाबाद तथा कोलकाता विश्वविद्यालयों से एंट्रेंस तथा मैट्रिक।
(iii) 1903 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से B.A.।
वृत्ति –
(i) 1904 में जयपुर दरबार की ओर से खेतड़ी के नाबालिग राजा जयसिंह के अभिभावक बनकर मेये कॉलेज, अजमेर आ गए।
(ii) जयपुर भवन छात्रावास के अधीक्षक।
(iii) 1916 में संस्कृत विभाग के अध्यक्ष।
(iv) अंतिम दिनों में मदनमोहन के निमंत्रण से हिन्दू विश्वविद्यालय बनारस में प्राचार्य तथा मनींद्र चंद्र नंदी पीठ के प्रोफेसर रहे।
संपादन पत्रिका – समालोचक, काशी नागरी प्रचारिणी पत्रिका
रचनाएँ –
कहानी - सुखमय जीवन (1911), बुद्धू का काँटा (1911), उसने कहा था (1915)
निबंध लिखे - कछुआ धरम, पुरानी हिन्दी, भारतवर्ष।
अंग्रेजी में - ए पोएम बाय भास, ए कमेंटरी ऑन कामसूत्र।
अध्याय 2: उसने कहा था (चन्द्रधर शर्मा गुलेरी) subjective
-: सप्रसंग व्याख्यात्मक प्रश्न (4 अंक) :-
1. मृत्यु के कुछ समय पहले स्मृति साफ हो जाती है।
उत्तर- प्रस्तुत पंक्ति चन्द्रधर शर्मा गुलेरी रचित 'उसने कहा था' कहानी के पाँचवे खंड से लिया गया है। जिसमें कहानीकार मरने से पहले मन की कैसी स्थिति होती है उसका वर्णन किया है। उस समय सिनेमा के रील की तरह संपूर्ण जीवन की घटनाएँ एवं दृश्य नाचती है। स्मृति बिल्कुल साफ हो जाती है। यह प्रसंग लहना सिंह की आसन्न मृत्यु के संदर्भ में है। उसे अपने बचपन की घटना बिल्कुल साफ-साफ याद आने लगती है।
2. निमोनिया से मरने वाले को मुरब्बे नहीं मिला करते।
उत्तर- प्रस्तुत पंक्ति चन्द्रधर शर्मा गुलेरी रचित "उसने कहा था" कहानी से लिया गया है। जिसमें लेखक ने सैनिकों के जीवन के दर्द को चित्रित किया है, सैनिक जागते हैं तभी देशवासी चैन की नींद सो पाते हैं। जाड़ा, गर्मी, वर्षा सभी काल में सैनिक देश की रक्षा करते हैं। लहना सिंह स्वयं मौत को झेल कर बोधा सिंह को बचाता है। इस तरह निमोनिया से मरने वाले को कोई इनाम नहीं मिलता है। अर्थात् मुरब्बे नहीं मिला करते।
सुधार: मूल चित्र में "मुख्खे" लिखा है, जो गलत है। सही शब्द "मुरब्बे" है। इसका अर्थ फल के संरक्षण से बनी मिठाई या यहाँ संदर्भ में 'जमीन के टुकड़े' (जो युद्ध वीरों को मिलते थे) से है।
3. "और अब घर जाओ तो कह देना कि मुझे जो उसने कहा था वह मैंने कर दिया।" 2015, 2016
उत्तर- प्रस्तुत पंक्ति "उसने कहा था" पाठ से लिया गया है जिसके रचनाकार चन्द्रधर शर्मा गुलेरी जी हैं। लहना सिंह एक वीर सिपाही था, उसने अपने प्राणों की बलि दे दी और उसने सूबेदार और उसके बेटे बोधा सिंह के प्राणों की रक्षा की। लहना सिंह को सूबेदारनी से बचपन का दिव्य प्रेम था। इसलिए लहना सिंह कहता है कि और अब घर जाओ सूबेदारनी से कह देना कि मुझे जो उसने कहा था, वह मैंने कर दिया।
4. बिना फेरे घोड़ा बिगड़ता है और बिना लड़े सिपाही।
उत्तर- प्रस्तुत पंक्ति 'उसने कहा था' नामक कहानी से लिया गया है। इस कहानी के लेखक चन्द्रधर शर्मा गुलेरी जी हैं। इस पंक्ति के माध्यम से लेखक हमें बताना चाहते है कि जिस प्रकार घोड़े को रोजाना दौड़ का अभ्यास नहीं कराया जाये तो घोड़ा बिगड़ जाता है। ठीक उसी प्रकार यदि सैनिक को युद्ध का अभ्यास न कराया जाय तो सैनिक वास्तविक युद्ध मे लड़ नहीं पायेंगे।
-: लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक) :-
1. 'उसने कहा था' कहानी कितने भागों में बंटी हुई है? कहानी के कितने भागों में युद्ध का वर्णन है?
उत्तर- 'उसने कहा था' कहानी पाँच भागों में बँटी हुई है। इस कहानी के तीन भागों में युद्ध का वर्णन है। द्वितीय, तृतीय तथा चतुर्थ भागों में युद्ध के दृश्य हैं।
2. बोधा सिंह कौन था?
उत्तर- बोधा सिंह 'उसने कहा था' कहानी का पात्र था जो चन्द्रधर शर्मा गुलेरी द्वारा रचित है। बोधा सिंह सूबेदार हजारा सिंह का बेटा था। जिसकी जान जर्मनी के युद्ध में लहना सिंह ने सूबेदारनी के कहने पर बचाया था।
3. 'उसने कहा था' कहानी के पात्रों का नाम लिखें।
उत्तर- 'उसने कहा था' कहानी चन्द्रधर शर्मा गुलेरी द्वारा रचित है। इस कहानी के प्रमुख पात्र व पात्रा लहना सिंह, सुबेदारनी, हजारा सिंह, बोधा सिंह, कीरत सिंह, बजीरा सिंह, जर्मन लपटन, विदेशी मेम छाबड़ीवाला, गोभीवाला आदि है।
4. फिरंगी मेम के बाग में क्या-क्या था?
उत्तर- यह प्रश्न 'उसने कहा था' पाठ से उद्धत है जो चन्द्रधर शर्मा गुलेरी द्वारा रचित है। फिरंगी मेम के बाग में मखमल-सी हरी घास थी। फल एवं दूध की वर्षा मेम कर देती थी।
5. लहना सिंह के प्रेम के बारे में लिखिए।
उत्तर- 'उसने कहा था' कहानी का नायक लहना सिंह का सूबेदारनी के प्रति अत्यन्त दिव्य प्रेम था। लहना सिंह को 12 वर्ष की उर्म में ही सूबेदारनी से प्रेम हो गया था। उस समय सूबेदारनी 8 वर्ष की थी यह प्रेम अमृतसर के बाजार में हुई और जर्मनी के युद्ध तक रहा। सूबेदारनी के कहने पर ही लहना सिंह ने जर्मनी युद्ध में बोधा सिंह की जान बचाई। और स्वयं मृत्यु को गले लगाएँ। इससे स्पष्ट है कि कहानीकार प्रेम का अर्थ त्याग होता है। कहना चाहते है।
6. "जाड़ा क्या है, मौत है और निमोनिया से मरने वालों को मुरब्बे नहीं मिला करते!" बजीरा सिंह के इस कथन का क्या आशय है?
उत्तर- प्रस्तुत प्रश्न चन्द्रधर शर्मा गुलेरी द्वारा रचित पाठ 'उसने कहा था' से उद्धत है। जाड़ा का अर्थ भीषण ठंड से है। युद्ध क्षेत्र में बजीरा सिंह लहना सिंह से कहता है कि तुमको कहीं ठंड न लग जाए। जाड़ा (ठंड) कितना अधिक है। कहीं मौत न हो जाय। निमोनिया बुखार हो जाने का डर है। निमोनिया से मरने वाले को कड़वी दवा दी जाती है। मुरब्बे नहीं।
7. लहना सिंह के चरित्र की विशेषताओं का वर्णन करें। या लहनासिंह का परिचय अपने शब्दों में दें।
उत्तर- 'उसने कहा था' कहानी का नायक लहना सिंह हैं। जो अपने मामा के साथ अमृतसर में रहता था। एक ओर तो वह भारतीय सेना में एक वीर सिपाही था। जो अपनी वीरता और निडरता के लिए जाना जाता था। तो दूसरी ओर निर्मल, निःस्वार्थ प्रेम सूबेदारनी से करता था। वह अपने प्रेम के लिए हैं युद्ध में बोधा सिंह की जान बचाया और स्वयं कुर्बान हो गए।
8. लपटन साहब की जेब से क्या बरामद हुआ था?
उत्तर- यह प्रश्न 'उसने कहा था' पाठ से उद्धत है। जहाँ लहना सिंह दीवार से छुपकर देखते हैं कि जर्मन लपटन साहब की जेब से बेल के बराबर आकार का तीन गोले बरामद हुआ।
9. पाठ से लहना और सूबेदारनी के संवादों को एकत्र करें।
उत्तर- * लहना सिंह- तेरे घर कहाँ है?
सुबेदारनी- 'मगरे में - और तेरे,
लहना सिंह - 'माँझे में। यहाँ कहाँ रहती है?'
सुबेदारनी - अतरसिंह की बैठक में, वे मेरे मामा है।'
लहना सिंह- 'में भी मामा के यहाँ आया हूँ, उनका घर गुरू बाजार में है।'
लहना सिंह - 'तेरी कुड़माई हो गई?' धत!
सुबेदारनी से- एक दिन फिर पूछा उत्तर आया हाँ हो गई।
लहना सिंह- 'कब?'
सुबेदारनी- 'कल, दे खते नहीं यह रेशमी कढ़ा सालू।'
10. लहना के गाँव में आया तुकी मौलवी क्या कहता था?
उत्तर- लहना सिंह के गाँव में आया तुर्की मौलवी यह कहता है कि जर्मनी वाले बड़े पंडित हैं वेद पढ़कर विमान चलाने की विद्या को जाने गये हैं। गौ को नहीं मारते।
11. "कल, देखते नहीं यह रेशम से कढ़ा हुआ सालू।" यह सुनते ही लहना की क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर- 'कल देखते नहीं' यह रेशम से कढ़ा हुआ सालू' यह सुनते ही लहना सिंह पर मानो जैसे वज्रपात हो गया। वह किसी को नाली में धकेला, छावड़ीवाले को गिरा दिया कुत्ते को पत्थर से मारा और किसी वैष्णवी से टकराकर अंधे की उपाधि पाई।
12. 'कहती है, तुम राजा हो, मेरे मुल्क को बचाने आये हो। वजीरा के इस कथन से किसकी ओर संकेत है?
उत्तर- 'कहती है, तुम राजा हो मेरे मुल्क को बचाने आये हो। वजीरा के इस कथन में 'फ्रांस की मेम' की ओर संकेत है।
-: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक) :-
1. 'उसने कहा था' कहानी का सारांश लिखिए।
उत्तर- 'उसने कहा था' कहानी के कहानीकार चन्द्रधर शर्मा गुलेरी जी हैं। कहानी की शुरुआत अमृतसर के भीड़ भरे बाजार से होती है। जहाँ बारह वर्ष का एक लड़का (लहनासिंह) आठ वर्ष की एक लड़की (सुबेदारनी) से पहली बार एक दुकान पर मिलता है। लड़का लड़की से पूछता है क्या तेरी कड़माई हो गई? लड़की धत् कहकर भाग जाती है। प्रेम के बीज का अंकुरण यहीं से होता है। प्रत्येक दूसरे-तीसरे दिन पर लड़का, लड़की से पूछता क्या तेरी कुड़माई हो गई है। एक दिन लड़की गुस्से में आकर कह दी हाँ हो गई है। पच्चीस वर्ष बाद जब भारतीय सैनिक अंग्रेजों के साथ जर्मनी से युद्ध कर रहे थे तब लहनासिंह की मुलाकात हजारा सिंह से हुआ था। एक बार लहना सिंह को सुबेदार हजारा सिंह के साथ युद्ध पर जाना था। इसलिए लहनासिंह हजारा सिंह के घर पर गये तब उन्होंने वहाँ सूबेदारनी को देखा जिससे वह निर्मल निःस्वार्थ प्रेम किया करते थे। तब इन्हें बचपन की याद आई। सूबेदारनी ने भी लहना सिंह को पहचान ली। और बोली युद्ध पर जा रहे हो तो मेरे पति सूबेदार हजारा सिंह और बेटा बोधा सिंह की युद्ध में रक्षा करना। लहनासिंह युद्ध में बोधा सिंह की जान बचाई। और मरने से पहले हजारा सिंह से कहा कि सूबेदारनी को कहना 'उसने कहा था' वो मैनें कर दिया।
2. 'उसने कहा था' कहानी का केन्द्रीय भाव क्या है?
उत्तर- 'उसने कहा था' कहानी का केन्द्रीय भाव यह है कि यह एक दिव्य प्रेम कहानी है जो अमृतसर शहर से शुरू होती है। ऐसी कहानी कहीं भी देखने को नहीं मिलती है। ऐसा समाज में भी घटित नहीं होता है। अभी की प्रेम कहानी शारीरिक बंधन में बंधी होती है। गुलेरी जी इस कहानी में प्रेम की दिव्यता को बताएँ है। प्रेम का अर्थ त्याग और बलिदान से है। यह एक सात्विक प्रेम कहानी है जहाँ लहनासिंह अपनी प्रेमिका के लिए कुर्बान हो जाते हैं।
3. लहना सिंह का दायित्व बोध और उसकी बुद्धि दोनों हीं स्पृहणीय है।' इस कथन की पुष्टि करें। 2025
उत्तर- लहना सिंह एक वीर सिपाही था। उसका व्यक्तित्व उच्च और बहुत त्यागपूर्ण था। वह विश्राम नहीं बल्कि युद्ध के लिए हर समय तैयार रहता था। लहना सिंह बहुत बुद्धिमान भी था। उसने नकली जर्मन लपटन साहब को पहचान लिया था। लहना सिंह में सहानुभूति, दया तथा करूणा का भाव भरा था। वह उतनी ठंड में भी अपना कम्बल बीमार बोधा सिंह को दे देता है। सूबेदारनी ने जो कही थी। उसने वही किया। हजारा सिंह और उसके बेटे बोधा सिंह के जान बचाये। इस तरह लहना सिंह का दायित्व बोध और उसकी बुद्धि दोनों हीं स्पृहणीय है।

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