12th Hindi Chapter 3 सम्पूर्ण क्रांति Subjective

 12th Hindi Chapter 3 सम्पूर्ण क्रांति Subjective 



दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)

1. सम्पूर्ण क्रांति का सारांश लिखें। [2019]

  • उत्तर: 'सम्पूर्ण क्रांति' पाठ जयप्रकाश नारायण द्वारा दिए गए एक ऐतिहासिक भाषण का अंश है, जो उन्होंने 5 जून 1974 को पटना के गांधी मैदान में दिया था। इस भाषण के माध्यम से उन्होंने भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ जनता और विशेषकर छात्रों का आह्वान किया। जेपी का मानना था कि लोकतंत्र में जनता को शांतिपूर्ण सभा करने और विरोध प्रदर्शन करने का पूरा हक है, बशर्ते वह हिंसक न हो। उनके इस आह्वान ने देश में व्यवस्था परिवर्तन की नींव रखी और कांग्रेस विरोधी राजनीति का मार्ग प्रशस्त किया।

2. संघर्ष समितियों से जयप्रकाश नारायण की क्या अपेक्षाएँ हैं?

  • उत्तर: जेपी के अनुसार संघर्ष समितियों का स्वरूप और कार्य निम्नलिखित होना चाहिए:

    • ये समितियाँ केवल छात्रों या आम जनता की ही होंगी।

    • इनका मुख्य उद्देश्य केवल शासन से लड़ना नहीं, बल्कि समाज के हर अन्याय और अनीति के विरुद्ध खड़े होना होगा।

    • गाँव में यदि कोई छोटा अफ़सर, कर्मचारी या पुलिस घूसखोरी करे, तो ये समितियाँ उनके खिलाफ आवाज उठाएँगी।

    • किसानों पर होने वाले किसी भी अत्याचार को रोकना और विभिन्न प्रकार के अन्यायों के विरुद्ध गाँव की रक्षा करना इनका मुख्य कार्य होगा।

3. जयप्रकाश नारायण के छात्र जीवन और अमेरिका प्रवास का परिचय दें। इस अवधि में कौन-कौन सी बातें आपको प्रभावित करती हैं?

  • उत्तर: * छात्र जीवन: जेपी की आरंभिक शिक्षा घर पर हुई, जिसके बाद वे पटना कॉलेजिएट गए। असहयोग आंदोलन के दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। वे विज्ञान (Science) के छात्र थे और उन्होंने बिहार विद्यापीठ से I.Sc. की परीक्षा उत्तीर्ण की।

    • अमेरिका प्रवास: जेपी के पिता की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे उन्हें विदेश भेज सकें। लेकिन जब जेपी ने सुना कि अमेरिका में मजदूरी करके भी छात्र पढ़ सकते हैं, तो वे वहां चले गए। उन्होंने वहां बागानों में काम किया, होटलों में बर्तन धोए और वेटर का काम भी किया।

    • प्रभावित करने वाली बातें: उनके जीवन का सबसे प्रेरक हिस्सा उनका संघर्ष है—एक निम्न-मध्यम वर्गीय छात्र का अपनी शिक्षा के लिए विदेशों में कठिन शारीरिक श्रम करना और विषम परिस्थितियों में भी मार्क्सवाद एवं समाजवाद जैसी विचारधाराओं का गहन अध्ययन करना।



I. सप्रसंग व्याख्यात्मक प्रश्न (4 अंक)

प्रश्न 1: "व्यक्ति से नहीं हमें तो नीतियों से झगड़ा है, सिद्धांतों से झगड़ा है, कार्यों से झगड़ा है।" [2019]

  • उत्तर: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'दिगंत भाग-2' के जयप्रकाश नारायण द्वारा रचित 'सम्पूर्ण क्रांति' शीर्षक भाषण से ली गई हैं। लेखक इन पंक्तियों के माध्यम से यह कहना चाहते हैं कि उनका व्यक्तिगत विरोध किसी से नहीं है, यहाँ तक कि इंदिरा जी से भी नहीं। उनका विरोध केवल उन गलत नीतियों और गलत सिद्धांतों से है जो देश और जनता के हित में नहीं हैं। यदि सरकार के कार्य जन-विरोधी होंगे, तो वे हमेशा उसका विरोध करेंगे।

प्रश्न 2: "अगर कोई डेमोक्रेसी का दुश्मन है, तो वे लोग दुश्मन हैं, जो जनता के शांतिमय कार्यक्रमों में बाधा डालते हैं, उनकी गिरफ्तारियाँ करते हैं, उन पर लाठी चलाते हैं, गोलियाँ चलाते हैं।"

  • उत्तर: यह अंश जयप्रकाश नारायण के भाषण से लिया गया है। जेपी कहते हैं कि लोकतंत्र की आधारशिला जनता की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। यदि सरकार जनता को शांतिपूर्ण सभा करने से रोकती है या उन पर बल प्रयोग (लाठी-गोली) करती है, तो ऐसी सरकार या अधिकारी वास्तव में लोकतंत्र के दुश्मन हैं।


II. लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1: जयप्रकाश नारायण की पत्नी का क्या नाम था? वे किसकी पुत्री थीं? [2019, 2021]

  • उत्तर: उनकी पत्नी का नाम प्रभावती देवी था। वे प्रसिद्ध गांधीवादी ब्रजकिशोर प्रसाद की पुत्री थीं।

प्रश्न 2: जयप्रकाश नारायण किस प्रकार का नेतृत्व देना चाहते थे? [2018]

  • उत्तर: जेपी का कहना था कि वे ऐसा नेता नहीं बनना चाहते जो केवल 'डिक्टेट' करे या आदेश दे। वे चाहते थे कि छात्र और जनता उन्हें सुझाव दें, बहस करें, लेकिन अंत में निर्णय उनका (जेपी का) होगा जिसे सभी को मानना होगा, तभी आंदोलन सफल हो सकता है।

प्रश्न 3: नारायण और नेहरू की किस विशेषता का उल्लेख जयप्रकाश नारायण ने अपने भाषण में किया है? [2011]

  • उत्तर: जेपी ने बताया कि नेहरू जी में एक महानता थी—वे आलोचनाओं को बर्दाश्त करते थे। पुराने समय के नेताओं में आलोचना सहने का धैर्य था और वे आलोचकों का सम्मान करते हुए उन्हें समझा-बुझाकर साथ लेकर चलने में विश्वास करते थे।

प्रश्न 4: जयप्रकाश नारायण कम्युनिस्ट पार्टी में क्यों नहीं शामिल हुए? [2023]

  • उत्तर: अमेरिका प्रवास के दौरान जेपी घोर कम्युनिस्ट थे। लेकिन जब वे भारत लौटे, तो उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी के बजाय कांग्रेस में शामिल होना चुना। इसका कारण लेनिन द्वारा दिया गया सिद्धांत था कि गुलाम देशों में कम्युनिस्टों को आजादी की लड़ाई के लिए वहां के मुख्य बुर्जुआ नेतृत्व (जैसे कांग्रेस) का साथ देना चाहिए।

प्रश्न 5: बँधी हुई मुट्ठियों का क्या लक्ष्य है? [2023]

  • उत्तर: बँधी हुई मुट्ठियों का लक्ष्य है—जनता की सरकार के खिलाफ एकजुट होना और समाज के शोषकों को सत्ता से बाहर निकालकर एक न्यायपूर्ण समाज की स्थापना करना।

प्रश्न 6: दलविहीन लोकतंत्र और साम्यवाद में कैसा संबंध है? [2024]

  • उत्तर: दलविहीन लोकतंत्र सर्वोदय का मुख्य राजनीतिक सिद्धांत है। मार्क्सवाद के अनुसार जैसे-जैसे समाज साम्यवाद की ओर बढ़ता है, राज्य (State) का क्षय होने लगता है और अंत में एक 'स्टेटलेस सोसाइटी' (राज्यविहीन समाज) की स्थापना होती है। यही विचारधारा दलविहीन लोकतंत्र का आधार है।

प्रश्न 7: जयप्रकाश नारायण के अनुसार डेमोक्रेसी का शत्रु कौन है? [2018]

  • उत्तर: जेपी के अनुसार डेमोक्रेसी (लोकतंत्र) के दुश्मन वे लोग और सरकारें हैं जो जनता के शांतिपूर्ण कार्यों और आंदोलनों में बाधा उत्पन्न करते हैं तथा दमनकारी नीतियों का सहारा लेते हैं।



लघु/दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (जारी)

प्रश्न 8: भ्रष्टाचार की जड़ क्या है? क्या आप जे० पी० के विचार से सहमत हैं? इसे दूर करने का क्या सुझाव देंगे?

  • उत्तर: जयप्रकाश नारायण के अनुसार भ्रष्टाचार की असली जड़ चुनाव का अत्यधिक खर्च है। चुनावों में करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, जिसे जुटाने के लिए गलत साधनों और काले धन का सहारा लिया जाता है।

  • सहमति और सुझाव: हम जे० पी० के विचारों से पूर्णतः सहमत हैं। इसे दूर करने के लिए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता लानी चाहिए और चुनाव खर्च को कम करने के लिए कड़े नियम बनाने चाहिए ताकि धनबल के बजाय जनबल को प्राथमिकता मिले।


प्रश्न 9: चुनाव सुधार के बारे में जयप्रकाश जी के प्रमुख सुझाव क्या हैं? उन सुझावों से आप कितना सहमत हैं?

  • उत्तर: चुनाव सुधार के लिए जे० पी० ने निम्नलिखित प्रमुख सुझाव दिए थे:

    1. मतदान की प्रक्रिया पूरी तरह से स्वच्छ और स्वतंत्र होनी चाहिए।

    2. जनता का अपने प्रतिनिधि पर पूरा अंकुश होना चाहिए (अर्थात् प्रतिनिधि चुनने के बाद भी जनता के प्रति जवाबदेह हो)।

    3. चुनाव प्रक्रिया में होने वाले खर्च को न्यूनतम किया जाना चाहिए।

    4. चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं को मिथ्या भाषण (झूठे वादों) का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

    5. प्रतिनिधि को ऐसा कार्य करना चाहिए जिससे लोकतंत्र उत्कृष्ट और मजबूत बन सके।


प्रश्न 10: दिनकर जी का निधन कहाँ और किन परिस्थितियों में हुआ था?

  • उत्तर: राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी का निधन मद्रास (अब चेन्नई) में हुआ था। वे वहाँ रामनाथ गोयनका के घर अतिथि के रूप में रुके थे। रात के समय उन्हें अचानक दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ा। उन्हें मात्र तीन मिनट के भीतर विलिंनगडन अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें बचाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन उनका हृदय फिर से धड़क नहीं सका और वहीं उनका देहावसान हो गया।


निष्कर्ष (सम्पूर्ण क्रांति का संदेश)

इन सभी उत्तरों से यह स्पष्ट होता है कि जेपी केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन चाहते थे। उनका मानना था कि जब तक चुनावों से भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा और जनता जागरूक नहीं होगी, तब तक सच्चा लोकतंत्र नहीं आ सकता।



सम्पूर्ण क्रांति: महत्वपूर्ण तथ्य 

  1. लेखक: जयप्रकाश नारायण (लोकनायक)।

  2. बचपन का नाम: बाउल।

  3. जन्म: 11 अक्टूबर 1902, सिताब दियारा (बिहार/यूपी)।

  4. माता-पिता: फूलरानी एवं हरसूदयाल।

  5. पत्नी: प्रभावती देवी (ब्रजकिशोर प्रसाद की पुत्री)।

  6. उच्च शिक्षा: अमेरिका (1922 में गए, वहां वेटर और मजदूरी का काम किया)।

  7. मार्क्सवादी बने: 1924 में (लेनिन की मृत्यु के वर्ष)।

  8. कांग्रेस में शामिल: 1929 में।

  9. जेल यात्रा: 1932 (सविनय अवज्ञा), 1943 (हजारीबाग जेल), और आपातकाल।

  10. पार्टी गठन: कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी (1934) और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी (1952)।

  11. ऐतिहासिक भाषण: 5 जून 1974, पटना के गांधी मैदान में।

  12. नारा: 'सम्पूर्ण क्रांति' (व्यवस्था परिवर्तन के लिए)।

  13. प्रमुख कृति: रिकंस्ट्रक्शन ऑफ इंडियन पॉलिटी।

  14. मैग्सेसे सम्मान: 1965 (समाज सेवा के लिए)।

  15. भारत रत्न: 1998 (मरणोपरांत)।

  16. भ्रष्टाचार की जड़: चुनाव का अत्यधिक खर्च।

  17. राजनीतिक सिद्धांत: दलविहीन लोकतंत्र (सर्वोदय का विचार)।

  18. लोकतंत्र के शत्रु: जनता पर लाठी-गोली चलाने वाली दमनकारी सरकार।

  19. रामधारी सिंह दिनकर का निधन: रामनाथ गोयनका के घर (मद्रास), दिल का दौरा पड़ने से।

  20. भाषण का संकलन: 'जन मुक्ति' नामक पुस्तक में।



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