Chapter 5 Political Science समकालीन दक्षिण एशिया
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
1. सार्क (SAARC) या दक्षेय क्या है?
उत्तर: 'सार्क' दक्षिण एशिया के 8 देशों का एक समूह (संगठन) है। इसका पूरा नाम 'दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन' है।
इसकी स्थापना 1985 में हुई थी।
इसमें कुल 8 सदस्य देश हैं: भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, मालदीव, अफगानिस्तान और श्रीलंका।
2. सार्क (SAARC) के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
उत्तर: सार्क को बनाने के मुख्य उद्देश्य ये हैं:
दक्षिण एशिया के लोगों का जीवन बेहतर बनाना और उनकी भलाई करना।
इस क्षेत्र के देशों में आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को तेज़ करना।
इन देशों के बीच आपसी भरोसा और आत्मनिर्भरता बढ़ाना।
विज्ञान, तकनीक और व्यापार के क्षेत्र में एक-दूसरे की मदद करना।
3. साफ़्टा (SAFTA) का क्या मतलब है? इसके लाभ और सीमाएं बताएं।
उत्तर: साफ़्टा का पूरा नाम 'दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र' है। इस पर 2004 में दस्तखत हुए और यह 2006 से लागू हुआ। इसका मकसद इन देशों के बीच व्यापार पर लगने वाले टैक्स (सीमा शुल्क) को कम करना है।
लाभ: (i) इससे सदस्य देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा और तालमेल बेहतर होगा। (ii) यह दुनिया के अन्य संगठनों (जैसे यूरोपीय संघ) की तरह मज़बूत बन सकता है।
सीमाएं (कमियां): (i) कुछ छोटे देशों को डर रहता है कि भारत इस व्यापार पर अपना कब्ज़ा जमा लेगा। (ii) कुछ देशों पर चीन का बढ़ता असर भी इसमें रुकावट बनता है।
4. धर्म-सापेक्ष राज्य किसे कहते हैं?
उत्तर: वह देश जहाँ शासन किसी ख़ास धर्म के नियमों के अनुसार चलाया जाता है और धर्म के आधार पर लोगों के बीच भेदभाव किया जाता है, उसे 'धर्म-सापेक्ष राज्य' कहते हैं।
उदाहरण: पाकिस्तान, जहाँ इस्लाम को राजधर्म घोषित किया गया है।
5. नस्लीय राष्ट्रवाद किसे कहते हैं?
उत्तर: जब किसी एक खास जाति या नस्ल के लोग एकजुट होकर आंदोलन करते हैं और अपने लिए एक अलग देश या राज्य की मांग करते हैं, तो उसे 'नस्लीय राष्ट्रवाद' कहते हैं।
उदाहरण: श्रीलंका में तमिल लोगों द्वारा किया जाने वाला संघर्ष।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
1. सार्क (SAARC) की असफलता के क्या कारण हैं?
उत्तर: सार्क के सही से काम न कर पाने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
भारत-पाक संबंध: भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार तनाव और आपसी झगड़ों के कारण यह संगठन सफल नहीं हो पा रहा है।
व्यापार की कमी: इस क्षेत्र के देश अभी भी गरीब या विकासशील हैं। आपसी व्यापार में कमी और एक-दूसरे का सहयोग न करने की भावना इसे कमज़ोर बनाती है।
भरोसे की कमी: इन देशों को एक-दूसरे पर शक रहता है। छोटे देशों को अक्सर डर लगता है कि बड़े देश उन पर हावी हो जाएंगे, इसलिए वे खुलकर साथ नहीं आते।
2. स्वतंत्र बांग्लादेश के बनने के मुख्य कारण क्या थे?
उत्तर: 1947 से 1971 तक बांग्लादेश 'पूर्वी पाकिस्तान' का हिस्सा था। इसके अलग होने के मुख्य कारण ये थे:
भाषा का विवाद: पश्चिमी पाकिस्तान वहां के लोगों पर ज़बरदस्ती 'उर्दू' भाषा थोपना चाहता था, जबकि वहां के लोग 'बंगाली' बोलते थे।
सांस्कृतिक भेदभाव: वहां की बंगाली संस्कृति और भाषा के साथ बुरा बर्ताव किया जाता था।
राजनीति में भेदभाव: वहां के लोगों को प्रशासन और राजनीति में बराबर का हक नहीं दिया जा रहा था।
शेख मुजीबुर्रहमान का नेतृत्व: जब वहां आज़ादी की मांग उठी, तो पाकिस्तानी सेना ने आंदोलन को कुचल दिया और हज़ारों शरणार्थी भारत आ गए।
भारत-पाक युद्ध: भारत ने इन शरणार्थियों की मदद की और 1971 में भारत-पाक युद्ध हुआ, जिसके बाद बांग्लादेश एक आज़ाद देश बना।
3. ताशकंद समझौता क्या है? इसकी मुख्य बातें लिखें।
उत्तर: ताशकंद समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच 1966 में हुआ एक शांति समझौता था। इसकी मुख्य बातें ये थीं:
दोनों देश अच्छे पड़ोसी बनकर रहेंगे और आपसी झगड़े शांति से सुलझाएंगे।
कोई भी देश एक-दूसरे के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देगा।
एक-दूसरे के खिलाफ ज़हरीला प्रचार नहीं करेंगे।
दोनों देश अपने राजनयिक संबंध (Diplomatic relations) फिर से शुरू करेंगे।
युद्ध के दौरान पकड़े गए कैदियों को छोड़ा जाएगा।
दोनों देशों की सेनाएं युद्ध से पहले वाली जगह पर वापस लौट जाएंगी।
Q.धर्मनिरपेक्ष राज्य से क्या समझतेहै?
उत्तर -धर्मनिरपेक्ष राज्य (Secular State) का अर्थ बहुत ही सरल है। पिछले उत्तर में हमने 'धर्म-सापेक्ष' (जैसे पाकिस्तान) के बारे में पढ़ा था, यह उसका ठीक उल्टा है।
आसान भाषा में इसके मुख्य बिंदु यहाँ दिए गए हैं:
धर्मनिरपेक्ष राज्य का अर्थ:
एक ऐसा राज्य या देश जिसका अपना कोई राजकीय धर्म नहीं होता और जो धर्म के आधार पर अपने नागरिकों के साथ कोई भेदभाव नहीं करता, उसे धर्मनिरपेक्ष राज्य कहते हैं।
इसकी मुख्य विशेषताएँ:
राज्य का कोई धर्म नहीं: सरकार किसी भी एक धर्म को बढ़ावा नहीं देती और न ही उसे 'राजधर्म' घोषित करती है।
सभी धर्म समान: कानून की नज़र में सभी धर्मों का दर्जा बराबर होता है। चाहे कोई बहुसंख्यक (ज्यादा आबादी वाला) हो या अल्पसंख्यक, सबको एक जैसे अधिकार मिलते हैं।
धार्मिक स्वतंत्रता: हर नागरिक को अपनी पसंद का धर्म मानने, उसकी पूजा करने और उसका प्रचार करने की पूरी आज़ादी होती है।
भेदभाव का अभाव: सरकारी नौकरी या शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति के साथ उसके धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता।
उदाहरण: भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। हमारे संविधान की प्रस्तावना में 'पंथनिरपेक्ष' (Secular) शब्द जोड़ा गया है, जिसका मतलब है कि भारत का अपना कोई धर्म नहीं है और यहाँ सभी धर्मों का सम्मान किया जाता है।
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