अध्याय 1: बातचीत (बालकृष्ण भट्ट)

कवि का परिचय

विवरणजानकारी
कविबालकृष्ण भट्ट
जन्म23 जून, 1844
निधन20 जुलाई, 1914
निवास-स्थानइलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
माता-पितामाता: पार्वती देवी, पिता: बेनी प्रसाद भट्ट
स्वभावउग्र (ग़ुस्सैल), जिसके कारण उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी
विशेष कार्य'हिन्दी प्रदीप' नामक मासिक पत्र का 33 वर्षों तक संपादन

महत्वपूर्ण जानकारी (Key Points)

  • बालकृष्ण भट्ट भारतेंदु युग के प्रमुख निबंधकार और गद्यकार थे।

  • इन्होंने लगभग 1000 निबंध लिखे हैं।

  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इन्हें हिंदी साहित्य का 'एडिसन और स्टील' कहा है।

  • रॉबिंसन क्रूसो ने 16 वर्षों तक किसी मनुष्य की आवाज़ नहीं सुनी थी; उन्होंने पहली बार 'फ्राइडे' के मुख से शब्द सुने।

  • बेन जॉनसन के अनुसार, "बोलने से ही मनुष्य के रूप का साक्षात्कार होता है।"

  • एडिसन का मानना है कि "असल बातचीत सिर्फ दो व्यक्तियों में ही हो सकती है।"


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

1. अगर हमें वाक्-शक्ति न होती, तो क्या होता? 'बातचीत' शीर्षक निबंध के आधार पर उत्तर दें।

उत्तर: ईश्वर द्वारा दी गई शक्तियों में वाक्-शक्ति (बोलने की शक्ति) सबसे महत्वपूर्ण है। यदि हममें यह शक्ति न होती, तो पूरी सृष्टि गूँगी और मूक प्रतीत होती। सभी मनुष्य किसी कोने में चुपचाप बिठा दिए गए होते। हम अपनी भावनाओं, सुख-दुख और विचारों को न तो किसी से साझा कर पाते और न ही दूसरों के अनुभव समझ पाते। जीवन पूरी तरह नीरस और जड़ हो जाता।

2. 'बातचीत' शीर्षक निबंध का सारांश लिखिए।

उत्तर: बालकृष्ण भट्ट द्वारा रचित यह निबंध बातचीत की कला और उसके महत्व पर प्रकाश डालता है। लेखक के अनुसार, ईश्वर ने मनुष्य को वाक्-शक्ति एक वरदान के रूप में दी है। जहाँ स्पीच (भाषण) का उद्देश्य जोश जगाना है, वहीं बातचीत का उद्देश्य मन को प्रसन्न करना है। लेखक बताते हैं कि बातचीत के जरिए मन के अंदर जमा मवाद या धुआँ भाप बनकर बाहर निकल जाता है और चित्त हल्का हो जाता है। उन्होंने यूरोप के 'आर्ट ऑफ कनवरसेशन' और स्वयं से बातचीत करने को सबसे उत्तम तरीका बताया है।

3. मनुष्य की बातचीत का उत्तम तरीका क्या हो सकता है? इसके द्वारा वह कैसे अपने लिए सर्वथा नवीन संसार की रचना कर सकता है?

उत्तर: बातचीत का सबसे उत्तम तरीका 'स्वयं से बात करना' (आत्म-वार्तालाप) है। मनुष्य को अपनी जिह्वा पर काबू रखकर अपनी अंतरात्मा से संवाद करना चाहिए। हमारी मनोवृत्ति हर पल बदलती रहती है, जो संसार का एक बड़ा आईना है। यदि हम अपनी वाणी पर नियंत्रण रखकर स्वयं को शिक्षित कर लें, तो हम किसी का दिल दुखाए बिना अपने लिए एक शांतिपूर्ण और नवीन संसार की रचना कर सकते हैं।


सप्रसंग व्याख्यात्मक प्रश्न (4 अंक)

1. "सच है, जबतक मनुष्य बोलता नहीं, तब तक उसका गुण-दोष प्रकट नहीं होता।"

उत्तर: प्रस्तुत पंक्ति बालकृष्ण भट्ट के निबंध 'बातचीत' से ली गई है। लेखक का भाव यह है कि मनुष्य की असली पहचान उसकी वाणी से होती है। जब तक कोई व्यक्ति चुप रहता है, तब तक उसके चरित्र की अच्छाइयों और बुराइयों का पता नहीं चलता। बातचीत के माध्यम से ही मनुष्य के गुण और दोष समाज के सामने आते हैं।

2. "जो कुछ मवाद या धुआँ जमा रहता है, वह बातचीत के जरिए भाप बनकर बाहर निकल पड़ता है।"

उत्तर: यह पंक्ति स्पष्ट करती है कि मनुष्य के मन में कई बार चिंता, कष्ट या द्वेष रूपी 'मवाद' जमा हो जाता है। यदि वह इसे अपने अंदर ही रखता है, तो यह भारीपन पैदा करता है। लेकिन जब वह किसी से खुलकर बातचीत करता है, तो वह सारा मानसिक तनाव और नकारात्मकता बातचीत के माध्यम से बाहर निकल जाती है और मन हल्का और स्वच्छ हो जाता है।


लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

1. 'आर्ट ऑफ कनवरसेशन' क्या है?

उत्तर: यह यूरोप के लोगों में बातचीत करने की एक विशेष कला है। इसमें ऐसी चतुराई से प्रसंग छेड़े जाते हैं कि सुनने वाले के कानों को अत्यंत सुख मिलता है। इसे 'सुहृद गोष्ठी' भी कहा जाता है।

2. बातचीत के संबंध में बेन जॉनसन और एडिसन के क्या विचार हैं?

उत्तर: बेन जॉनसन का मानना है कि बोलने से ही मनुष्य के असली रूप का पता चलता है। वहीं, एडिसन का विचार है कि शुद्ध और वास्तविक बातचीत केवल दो व्यक्तियों के बीच ही संभव है, जहाँ वे अपना दिल एक-दूसरे के सामने खोलते हैं।

4. बातचीत शीर्षक पाठ में दो बुढ़ियों की बातचीत का प्रकरण क्या है?

उत्तर: लेखक के अनुसार, दो बुढ़ियों की बातचीत का मुख्य विषय अक्सर 'बहु-बेटी' का प्रसंग होता है। वे अपनी बहुओं या बेटों की शिकायतें या पुरानी बातों का रोना रोती हैं, जिसमें अक्सर बिरादरी की निंदा भी शामिल होती है।

5. दो हमजोली सहेलियों की बातचीत में क्या स्थिति होती है?

उत्तर: दो हमजोली सहेलियों की बातचीत में 'रस का समुद्र' उमड़ आता है। उनकी बातें इतनी आनंददायक और मिठास भरी होती हैं कि उसका पूरा स्वाद उन्हीं से पूछना चाहिए।


टिप: परीक्षा में उत्तर लिखते समय महत्वपूर्ण शब्दों (जैसे- वाक्-शक्ति, आर्ट ऑफ कनवरसेशन, एडिसन) को अंडरलाइन (रेखांकित) ज़रूर करें। इससे परीक्षक पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।



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