Hindi 12th Chapter 8 सिपाही की मां subjective qna



लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)

1. बिशनी कौन है? इसको किसकी प्रतीक्षा है?

उत्तर: बिशनी 'सिपाही की माँ' एकांकी की मुख्य पात्र है। वह एक गरीब और भोली ग्रामीण महिला है। उसे अपने इकलौते बेटे मानक की प्रतीक्षा है, जो द्वितीय विश्व युद्ध में सिपाही बनकर बर्मा (म्यांमार) लड़ने गया है।

2. एकांकी और नाटक में क्या अंतर है?

उत्तर: एकांकी और नाटक में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:

  • एकांकी: इसमें केवल एक ही अंक होता है। इसकी कथा संक्षिप्त होती है और इसका मंचन (Stage performance) आसान होता है।

  • नाटक: इसमें कई अंक होते हैं। इसकी कथावस्तु विस्तृत होती है और इसका मंचन एकांकी की तुलना में कठिन होता है।

3. मानक और सिपाही एक-दूसरे को क्यों मारना चाहते हैं?

उत्तर: मानक और सिपाही एक-दूसरे के दुश्मन नहीं हैं, बल्कि वे दो अलग-अलग सेनाओं के सदस्य हैं जो युद्ध के मैदान में आमने-सामने हैं। युद्ध की क्रूरता उन्हें एक-दूसरे का दुश्मन बना देती है। आत्मरक्षा और अपनी ड्यूटी निभाने के लिए वे एक-दूसरे को मारना चाहते हैं।

4. कुंती का परिचय दें।

उत्तर: कुंती, बिशनी की पड़ोसन है। वह एक सामान्य ग्रामीण महिला है जो बिशनी के घर आकर मानक की चिट्ठी के बारे में पूछती है और बिशनी की बेटी 'मुन्नी' की शादी को लेकर अपनी चिंता और राय प्रकट करती है।

5. बिशनी मानक को लड़ाई में क्यों भेजती है?

उत्तर: बिशनी की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है। उसे अपनी जवान बेटी मुन्नी की शादी के लिए रुपयों की सख्त जरूरत थी। घर की गरीबी दूर करने और मुन्नी के हाथ पीले करने के उद्देश्य से ही उसने मानक को सेना में भेजा था।

6. मानक स्वयं को वहशी और जानवर से भी बढ़कर क्यों कहता है?

उत्तर: युद्ध की विभीषिका मनुष्य को अपनी संवेदनाएं भूलने पर मजबूर कर देती है। मानक युद्ध के उस मानसिक दबाव में है जहाँ उसे लगता है कि यदि वह दुश्मन को नहीं मारेगा, तो दुश्मन उसे मार देगा। इसी हिंसक मजबूरी के कारण वह स्वयं को जानवर से भी बढ़कर कहता है।

7. बिशनी और मुन्नी को किसकी प्रतीक्षा है? वे डाकिये की राह क्यों देखती हैं?

उत्तर: बिशनी और मुन्नी को मानक की प्रतीक्षा है। वे डाकिये की राह इसलिए देखती हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद होती है कि डाकिया मानक की चिट्ठी (पत्र) लेकर आएगा, जिससे उन्हें मानक की कुशलता का समाचार मिल सके।

8. बिशनी मानक की माँ है पर उसमें किसी भी सिपाही की माँ को ढूँढ़ा जा सकता है, कैसे?

उत्तर: बिशनी के भीतर की ममता सार्वभौमिक (Universal) है। जब वह अपने बेटे मानक को बचाती है, तो साथ ही दुश्मन सिपाही पर भी दया करती है। वह सोचती है कि उस सिपाही की भी माँ होगी जो उसके न लौटने पर तड़प उठेगी। यह करुण और वात्सल्य उसे सिर्फ मानक की नहीं, बल्कि हर सिपाही की माँ बना देता है।

9. आपके विचार से 'सिपाही की माँ' एकांकी का सबसे सशक्त पात्र कौन है और क्यों?

उत्तर: इस एकांकी का सबसे सशक्त पात्र बिशनी है। वह न केवल एक ममतामयी माँ है, बल्कि अत्यंत साहसी और उदार भी है। वह युद्ध की नफरत के बीच भी मानवता को जीवित रखती है और दुश्मन के प्रति भी दया भाव रखती है, जो उसे सबसे प्रभावशाली बनाता है।

10. 'सिपाही की माँ' एकांकी में दोनों लड़कियां कौन हैं?

उत्तर: 'सिपाही की माँ' एकांकी में दोनों लड़कियां बर्मा (म्यांमार) के रंगून शहर से आई शरणार्थी हैं। जापानी बमबारी के कारण उनका घर और परिवार उजड़ गया था, जिसके बाद वे अपनी जान बचाकर लंबी दूरी तय कर भारत आईं और भीख माँगकर अपना गुजारा कर रही हैं।

11. सिपाही के घर की स्थिति मानक के घर से भिन्न नहीं है। कैसे?

उत्तर: मानक और दुश्मन सिपाही, दोनों ही गरीब परिवारों के सहारा हैं। मानक पर अपनी माँ और बहन की जिम्मेदारी है, तो सिपाही पर अपनी बूढ़ी माँ और गर्भवती पत्नी की। दोनों ही आर्थिक तंगी के कारण युद्ध में आए हैं। अतः दोनों की पारिवारिक और सामाजिक स्थिति एक जैसी है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Question)

1. 'सिपाही की माँ' एकांकी का सारांश लिखें।

उत्तर: मोहन राकेश द्वारा रचित 'सिपाही की माँ' एक मर्मस्पर्शी एकांकी है जो युद्ध की विभीषिका और एक माँ के हृदय की पीड़ा को दर्शाती है।

कथावस्तु: इस कहानी का केंद्र एक गरीब परिवार है, जिसमें माँ (बिशनी), बेटी (मुन्नी) और बेटा (मानक) हैं। मानक इकलौता कमाने वाला है जो बर्मा के युद्ध में सिपाही बनकर गया है। घर की आर्थिक स्थिति खराब है और मुन्नी की शादी के लिए पैसों की जरूरत है। पूरा परिवार मानक की चिट्ठी का बेसब्री से इंतजार करता है।

मुख्य मोड़: एकांकी में एक स्वप्न दृश्य आता है जहाँ मानक घायल अवस्था में घर पहुँचता है और उसका पीछा एक दुश्मन सिपाही कर रहा होता है। दोनों एक-दूसरे को मारना चाहते हैं, लेकिन बिशनी ममता के वशीभूत होकर दोनों को बचाना चाहती है। वह दुश्मन सिपाही को भी अपना बेटा मानकर उसे मारने से रोकती है।

निष्कर्ष: यह एकांकी स्पष्ट करती है कि युद्ध केवल दो सेनाओं के बीच नहीं होता, बल्कि यह कई परिवारों को उजाड़ देता है। बिशनी के माध्यम से लेखक ने यह संदेश दिया है कि ममता की कोई सीमा या सरहद नहीं होती; एक माँ के लिए हर सिपाही उसका अपना बेटा होता है।