Sociology chapter- 2: जनसांख्यिकीय संरचना subjective लघु उत्तरीय प्रश्न

Sociology chapter- 2: जनसांख्यिकीय संरचना subjective 

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. जनसांख्यिकी (जनांकिकी) का क्या अर्थ है?

उत्तर: जनसांख्यिकी को अंग्रेजी में 'Demography' कहते हैं, जो दो ग्रीक शब्दों— 'Demos' (जनता) और 'Graphien' (वर्णन करना) से बना है। इसका शाब्दिक अर्थ है "लोगों का वर्णन"। यह वह विज्ञान है जिसके अंतर्गत किसी क्षेत्र की जनसंख्या के आकार, संरचना, जन्म-मृत्यु दर, लिंगानुपात और साक्षरता आदि का सांख्यिकीय विश्लेषण किया जाता है।

2. माल्थस का जनसंख्या सिद्धांत मुख्यतया किस मान्यता पर आधारित है? (अथवा माल्थस का जनसंख्या वृद्धि सिद्धांत क्या है?)

उत्तर: थॉमस रॉबर्ट माल्थस के अनुसार, जनसंख्या और खाद्य संसाधनों के बीच गहरा असंतुलन होता है। उनकी मुख्य मान्यताएँ थीं:

  • जनसंख्या वृद्धि: जनसंख्या ज्यामितीय (Geometric) दर (जैसे: 2, 4, 8, 16...) से बहुत तेज़ी से बढ़ती है।

  • संसाधन वृद्धि: जीवन निर्वाह के साधन (भोजन) अंकगणितीय (Arithmetic) दर (जैसे: 1, 2, 3, 4...) से धीमी गति से बढ़ते हैं।

  • परिणाम: इस असंतुलन के कारण समाज में गरीबी, भुखमरी और बीमारियाँ बढ़ती हैं।

3. जनसंख्या विस्फोट किसे कहते हैं?

उत्तर: जब किसी देश की मृत्यु दर में तो तेज़ गिरावट आए (बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण), लेकिन जन्म दर लंबे समय तक उच्च बनी रहे, तो जनसंख्या में होने वाली तीव्र वृद्धि को 'जनसंख्या विस्फोट' कहा जाता है। यह जनसांख्यिकीय संक्रमण सिद्धांत की दूसरी अवस्था होती है।

4. लिंग समानता क्या है?

उत्तर: लिंग समानता का अर्थ है कि समाज में स्त्री, पुरुष और ट्रांसजेंडर (अन्य लिंग) को समान अधिकार, समान अवसर और समान सम्मान प्राप्त हो। किसी भी व्यक्ति के साथ उसके लिंग के आधार पर भेदभाव न करना ही वास्तविक लिंग समानता है।

5. जन्म-दर एवं मृत्यु-दर में अंतर बताइए।

उत्तर: * जन्म-दर: प्रति 1000 व्यक्तियों पर एक वर्ष में जन्म लेने वाले जीवित बच्चों की संख्या।

  • मृत्यु-दर: प्रति 1000 व्यक्तियों पर एक वर्ष में मरने वाले व्यक्तियों की संख्या।


दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. हमारे जीवन में जनांकिकी के अध्ययन का महत्त्व स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: जनांकिकी का अध्ययन व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  1. नियोजन में सहायक: जनसंख्या के आंकड़ों से सरकार को भविष्य की योजनाएं (स्कूल, अस्पताल, आवास) बनाने में मदद मिलती है।

  2. आर्थिक विकास का आकलन: इसके द्वारा देश की प्रति व्यक्ति आय और जीवन स्तर का पता चलता है।

  3. संसाधनों का वितरण: जनसंख्या के आकार को जानकर संसाधनों का सही आवंटन किया जा सकता है।

  4. सामाजिक समस्याओं की पहचान: गरीबी, बेरोजगारी और भुखमरी जैसी समस्याओं का सांख्यिकीय विश्लेषण संभव होता है।

2. जनसांख्यिकी के मुख्य प्रकारों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।

उत्तर: इसे मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है:

  • आकारिक जनसांख्यिकी (Formal Demography): इसमें जनसंख्या के मात्रात्मक पक्ष जैसे—कुल संख्या, गणना, लिंगानुपात और घनत्व का सांख्यिकीय अध्ययन होता है।

  • सामाजिक जनसांख्यिकी (Social Demography): इसमें जनसंख्या के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रभावों का अध्ययन किया जाता है।

3. जनसंख्या की दृष्टि से भारत की क्या स्थिति है?

उत्तर: भारत विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश है (2011 की जनगणना के अनुसार)। विश्व की कुल जनसंख्या का लगभग 17.5% भाग भारत में रहता है। जहाँ 1901 में भारत की जनसंख्या 23.8 करोड़ थी, वहीं 2011 में यह बढ़कर 121.05 करोड़ हो गई। यह तीव्र वृद्धि 'जनसंख्या विस्फोट' को दर्शाती है, जिसे नियंत्रित करने के लिए सरकार परिवार नियोजन जैसे कार्यक्रम चला रही है।

4. जनांकिकी के महत्त्व से संबंधित किन्हीं दो बिन्दुओं पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: 1. नीति निर्धारण: जनांकिकी के माध्यम से जन्म-दर, मृत्यु-दर और प्रवास की जानकारी मिलती है, जो देश के विकास की नीतियां बनाने में सहायक है।

2. सामाजिक-आर्थिक विश्लेषण: इसके द्वारा समाज की स्वास्थ्य स्थिति, शिक्षा का स्तर और जीवन प्रत्याशा का मूल्यांकन किया जा सकता है।

5. भारत में जनसांख्यिकीय लाभांश की मुख्य विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) का अर्थ है—जब देश में कार्यशील जनसंख्या (15-59 वर्ष) का अनुपात, आश्रित जनसंख्या (बच्चे और वृद्ध) से अधिक हो।

  • भारत की आयु संरचना: भारत में लगभग 60% जनसंख्या कार्यशील (युवा) वर्ग में है।

  • आश्रित वर्ग: 14 वर्ष से कम आयु के लोग लगभग 32% और 60 वर्ष से अधिक के लगभग 8% हैं। यह स्थिति भारत को आर्थिक विकास के लिए एक बड़ा अवसर प्रदान करती है।





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